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Iranian Hackers पर बड़ा आरोप, US सैन्य कर्मियों की लोकेशन ट्रैक करने के लिए Telecom सिस्टम का किया इस्तेमाल
साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं का दावा है कि Iran-US तनाव बढ़ने से पहले पुराने टेलीकॉम सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाकर अमेरिकी सैन्य कर्मियों और ठेकेदारों की लोकेशन ट्रैक की गई।
Iran और United States के बीच बढ़ते तनाव के बीच अब साइबर सुरक्षा को लेकर एक नया दावा सामने आया है। साइबर सुरक्षा शोधकर्ताओं की एक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि Iranian Hackers ने मध्य पूर्व के पुराने टेलीकॉम नेटवर्क की कमजोरियों का फायदा उठाकर अमेरिकी सैन्य कर्मियों और रक्षा ठेकेदारों की लोकेशन का पता लगाने की कोशिश की।
रिपोर्ट के अनुसार, यह कथित गतिविधि उस समय की गई जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा था। शोधकर्ताओं का कहना है कि हमलावरों ने पुराने दूरसंचार सिस्टम में मौजूद सुरक्षा खामियों का उपयोग कर संवेदनशील जानकारी जुटाने का प्रयास किया।
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विशेषज्ञों का मानना है कि कई देशों में अब भी कुछ पुराने टेलीकॉम प्रोटोकॉल और नेटवर्क उपयोग में हैं, जिनमें आधुनिक साइबर सुरक्षा मानकों के अनुरूप सुरक्षा नहीं होती। ऐसे सिस्टम साइबर हमलों और निगरानी के लिए अपेक्षाकृत आसान लक्ष्य बन सकते हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कथित तौर पर अमेरिकी सैन्य कर्मियों और रक्षा ठेकेदारों की गतिविधियों और संभावित लोकेशन की पहचान करने की कोशिश की गई। हालांकि, इस बात का कोई सार्वजनिक प्रमाण नहीं दिया गया है कि इस कथित अभियान से वास्तविक सैन्य अभियानों पर कितना असर पड़ा।

अब तक United States सरकार की ओर से इस रिपोर्ट पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। वहीं, Iran ने भी इन आरोपों को लेकर कोई सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है। ऐसे में इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध केवल जमीन, समुद्र और हवा तक सीमित नहीं रह गया है। अब डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, संचार नेटवर्क और डेटा सुरक्षा भी राष्ट्रीय सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे घटनाक्रम सरकारों और सुरक्षा एजेंसियों के लिए साइबर सुरक्षा ढांचे को लगातार मजबूत करने की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं।
मौजूदा हालात में इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि संवेदनशील क्षेत्रों में पुराने टेलीकॉम सिस्टम को आधुनिक और सुरक्षित तकनीक से बदलना कितना जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह के संभावित साइबर खतरों को रोका जा सके।
