Entertainment
R. Madhavan ने बेटे वेदांत को 15 साल तक नहीं दिया खाली समय कनाडा में सीखा ऐसा पैरेंटिंग मंत्र जिसने बदल दी सोच
आर माधवन ने बताया क्यों बच्चों को सिर्फ महंगे स्कूल और बर्थडे पार्टी नहीं बल्कि संस्कार और व्यस्त दिनचर्या की जरूरत होती है।
बॉलीवुड अभिनेता R. Madhavan अपनी फिल्मों के साथ-साथ अपनी सादगी और पारिवारिक मूल्यों के लिए भी जाने जाते हैं। हाल ही में उन्होंने अपने बेटे Vedaant Madhavan की परवरिश को लेकर ऐसी बातें साझा कीं, जिसने आज के मॉडर्न पैरेंटिंग कल्चर पर एक नई बहस छेड़ दी है।
माधवन ने कहा कि आजकल कई माता-पिता बच्चों की पढ़ाई, स्कूल फीस और जन्मदिन की पार्टियों पर इतना खर्च कर रहे हैं कि कभी-कभी वह जरूरत से ज्यादा दिखावा लगने लगता है। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि कुछ लोग अपने बच्चे के पहले जन्मदिन पर उतना पैसा खर्च कर देते हैं, जितना उन्होंने खुद अपनी शादी में भी नहीं किया था।
अभिनेता का मानना है कि बच्चों को सिर्फ महंगी चीजें देना ही अच्छी परवरिश नहीं होती। असली जरूरत उन्हें जमीन से जुड़े संस्कार देने की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अपने बेटे वेदांत को हमेशा यह समझाने की कोशिश की कि जिंदगी में जो सुविधाएं उन्हें मिली हैं, वह किसी की मेहनत का नतीजा हैं।
और भी पढ़ें : Alia Bhatt ने Cannes 2026 में किया धमाकेदार आगाज़ Princess-inspired Ball Gown में दिखीं बेहद खूबसूरत
माधवन ने एक उदाहरण देते हुए कहा कि वह अक्सर अपने बेटे को समझाते थे कि एक महंगे जूते की कीमत किसी कर्मचारी की पूरे साल की कमाई के बराबर हो सकती है। उनका मानना है कि बच्चों में “ग्रैटिट्यूड” यानी आभार की भावना होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने वेदांत को हर व्यक्ति का सम्मान करना सिखाया। चाहे वह सोसाइटी का गार्ड हो, लिफ्टमैन हो या ड्राइवर। माधवन चाहते थे कि उनका बेटा हर किसी से विनम्रता से पेश आए और उन्हें सम्मान के साथ संबोधित करे।
इंटरव्यू के दौरान माधवन ने कनाडा के अपने दिनों का एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया। उन्होंने बताया कि जिस शहर में वह रहे थे, वहां कम उम्र में नशा और गलत आदतें आम बात थीं। लेकिन एक परिवार ऐसा था जिसके बच्चे बेहद अनुशासित और संतुलित थे। जब उन्होंने उस परिवार की महिला से पूछा कि उसने अपने बच्चों को इतनी अच्छी परवरिश कैसे दी, तो उसे जो जवाब मिला, वही उनकी पैरेंटिंग का सबसे बड़ा मंत्र बन गया।

उस महिला ने माधवन से कहा था — “अपने बच्चों को फ्री टाइम मत दो।”
माधवन ने बताया कि उन्होंने इस सलाह को पूरी तरह अपनाया। उनका कहना है कि बच्चों को खेल, संगीत, पढ़ाई, आउटडोर एक्टिविटी या किसी भी रचनात्मक काम में व्यस्त रखना चाहिए। जरूरी नहीं कि बच्चा हर काम में परफेक्ट हो, लेकिन उसका समय सकारात्मक चीजों में लगना चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर बच्चे का समय अच्छे कामों में बीतेगा, तो उसे गलत चीजों की तरफ सोचने या भटकने का मौका कम मिलेगा। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि बच्चों पर दबाव नहीं डालना चाहिए। एक्टिविटी मजेदार होनी चाहिए, बोझ नहीं।
सोशल मीडिया पर माधवन की यह सोच काफी पसंद की जा रही है। कई लोग इसे आज के समय की सबसे जरूरी पैरेंटिंग सलाह बता रहे हैं। जहां एक तरफ बच्चे मोबाइल और स्क्रीन की दुनिया में तेजी से खो रहे हैं, वहीं माधवन की बात कई परिवारों को सोचने पर मजबूर कर रही है कि असली निवेश बच्चों के संस्कार और समय में होना चाहिए, सिर्फ महंगे गिफ्ट्स में नहीं।
R. Madhavan ने 1999 में सरिता बिरजे से शादी की थी और उनका बेटा Vedaant Madhavan आज भारत के उभरते तैराकों में गिना जाता है। वेदांत ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का नाम रोशन किया है, और माधवन अक्सर उसकी उपलब्धियों पर गर्व जताते नजर आते हैं।
