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Sonam Wangchuk की रिहाई का आदेश — महीनों बाद सरकार ने NSA के तहत हिरासत रद्द की
Leh में हुई हिंसा के बाद Jodhpur जेल में बंद किए गए थे Wangchuk — Supreme Court में पत्नी की याचिका के बीच केंद्र सरकार ने लिया बड़ा फैसला
जलवायु कार्यकर्ता और इंजीनियर Sonam Wangchuk को आखिरकार राहत मिल गई है। केंद्र सरकार ने शनिवार को ऐलान किया कि Wangchuk की National Security Act (NSA) के तहत हिरासत तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी गई है। Ministry of Home Affairs (MHA) ने इस फैसले की जानकारी दी।
यह वही Sonam Wangchuk हैं जिन्हें Bollywood की मशहूर फिल्म ‘3 Idiots’ के किरदार ‘Phunsukh Wangdu’ की प्रेरणा माना जाता है — और जो Ladakh के लिए राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा की माँग को लेकर लंबे समय से आवाज़ उठाते आए हैं।
कब और क्यों हुई थी गिरफ्तारी?
पिछले साल सितंबर में Leh में हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद Wangchuk को हिरासत में लिया गया था। सरकार ने कहा था कि उन्हें “सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने” के लिए NSA के तहत हिरासत में लिया गया। इसके बाद उन्हें Rajasthan के Jodhpur स्थित जेल में भेज दिया गया।
NSA एक ऐसा कानून है जिसके तहत किसी व्यक्ति को बिना मुकदमे के लंबे समय तक हिरासत में रखा जा सकता है — और यही बात उनके समर्थकों और परिवार के लिए सबसे बड़ी चिंता थी।
सरकार ने क्या कहा?
MHA ने अपने बयान में कहा, “सरकार Ladakh में शांति, स्थिरता और आपसी विश्वास का माहौल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है ताकि सभी stakeholders के साथ रचनात्मक और सार्थक संवाद संभव हो सके। इसी उद्देश्य के तहत और उचित विचार के बाद, सरकार ने National Security Act के तहत उपलब्ध शक्तियों का उपयोग करते हुए Shri Sonam Wangchuk की हिरासत को तत्काल प्रभाव से रद्द करने का निर्णय लिया है।”
सरकार ने यह भी कहा कि वह Ladakh के लोगों की आकांक्षाओं और चिंताओं को दूर करने के लिए stakeholders और सामुदायिक नेताओं के साथ बातचीत कर रही है।
हालाँकि सरकार ने बंद और विरोध प्रदर्शनों की आलोचना करते हुए कहा कि इनसे “समाज के शांतिप्रिय चरित्र को नुकसान पहुँचा है और छात्रों, नौकरी के इच्छुकों, व्यापारियों, tour operators, पर्यटकों और समग्र अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है।”
केंद्र का पुराना आरोप और पत्नी की Supreme Court याचिका

इससे पहले केंद्र सरकार ने आरोप लगाया था कि Wangchuk ने युवाओं — खासकर Gen Z — को Nepal और Bangladesh जैसे विरोध प्रदर्शनों के लिए उकसाने की कोशिश की थी। यह एक गंभीर आरोप था जिसे Wangchuk के समर्थकों ने सिरे से खारिज किया था।
उधर Wangchuk की पत्नी Gitanjali J Angmo ने Supreme Court में याचिका दायर कर उनकी हिरासत को चुनौती दी थी। Angmo ने इसे “अवैध और मनमाना” बताते हुए कहा था कि यह हिरासत उनके पति के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है।
Ladakh की माँगें और लंबा संघर्ष
Sonam Wangchuk पिछले कई वर्षों से Ladakh को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, Sixth Schedule के तहत संवैधानिक सुरक्षा, और स्थानीय लोगों के लिए सरकारी नौकरियों में आरक्षण की माँग को लेकर लड़ रहे हैं। 2019 में जब Jammu & Kashmir को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बाँटा गया और Ladakh को बिना विधानसभा के केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया, तब से यह माँगें और तेज़ हो गई थीं।
Wangchuk ने इससे पहले भी कई बार भूख हड़ताल और पदयात्राएँ कर देश का ध्यान Ladakh की समस्याओं की तरफ खींचा था। पिछले साल उनकी Delhi Chalo पदयात्रा ने देशभर में सुर्खियाँ बटोरी थीं।
अब जबकि सरकार ने उनकी रिहाई का आदेश दिया है, Ladakh के लोग उम्मीद कर रहे हैं कि यह कदम महज एक औपचारिकता न बनकर रहे — बल्कि इसके बाद सरकार वाकई Ladakh की जायज़ माँगों पर ठोस बातचीत की मेज़ पर बैठे।
