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Iran-US शांति वार्ता से पहले Trump का ‘रहस्यमयी पोस्ट’, क्या होने वाला है बड़ा ‘रीसेट’?

इस्लामाबाद में होने वाली हाई-लेवल बातचीत से पहले Donald Trump का संकेत, दुनिया की नजरें वार्ता पर टिकीं

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Donald Trump’s ‘Reset’ Post Before Iran-US Talks Sparks Speculation
ईरान-US वार्ता से पहले डोनाल्ड ट्रंप का ‘रीसेट’ पोस्ट बना चर्चा का केंद्र

ईरान और अमेरिका के बीच होने जा रही अहम शांति वार्ता से ठीक पहले Donald Trump का एक रहस्यमयी सोशल मीडिया पोस्ट चर्चा का विषय बन गया है। ट्रंप ने “World’s Most Powerful Reset!!!” लिखकर संकेत दिया, लेकिन इसके पीछे का असली मतलब अभी साफ नहीं हो पाया है।

यह पोस्ट ऐसे समय आया है जब United States और Iran के बीच बहुप्रतीक्षित वार्ता Islamabad में शुरू होने जा रही है। इस बैठक को 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद दोनों देशों के बीच सबसे अहम कूटनीतिक प्रयास माना जा रहा है।

कौन-कौन होंगे शामिल?
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व JD Vance कर रहे हैं, जबकि उनके साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ट्रंप के दामाद Jared Kushner भी मौजूद रहेंगे। वहीं ईरान की ओर से संसद अध्यक्ष और विदेश मंत्री स्तर के नेता शामिल हो सकते हैं।

कठिन शर्तों के साथ बातचीत
दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी गहरे हैं। ईरान ने अपने प्रस्ताव में स्ट्रेट ऑफ होरमुज पर नियंत्रण, अमेरिकी सेना की वापसी और सभी प्रतिबंध हटाने की मांग की है। वहीं अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने संवर्धित यूरेनियम का भंडार खत्म करे।

इससे पहले हाल ही में दोनों देशों के बीच छह हफ्तों तक संघर्ष चला, जिसमें बड़े पैमाने पर हमले और जवाबी कार्रवाई हुई। इसके चलते वैश्विक तेल बाजार भी बुरी तरह प्रभावित हुआ और कीमतें $120 प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।

ट्रंप का संकेत—सिर्फ पोस्ट या बड़ा मैसेज?
ट्रंप ने हाल ही में यह भी कहा कि वह शांति समझौते को लेकर “आशावादी” हैं और ईरान के नेता निजी बातचीत में ज्यादा “व्यावहारिक” नजर आ रहे हैं। ऐसे में उनका ‘रीसेट’ पोस्ट क्या किसी बड़ी डील का संकेत है या सिर्फ एक सामान्य बयान—यह अभी साफ नहीं है।

Donald Trump’s ‘Reset’ Post Before Iran-US Talks Sparks Speculation


निष्कर्ष
इस्लामाबाद में होने वाली यह वार्ता न सिर्फ मध्य-पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या यह ‘रीसेट’ वाकई एक नई शुरुआत का संकेत देगा या सिर्फ एक और कूटनीतिक बयान बनकर रह जाएगा।

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