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Trump ने जिस तेल भंडार को लेकर Biden को घेरा था, अब खुद उसी reserves का सहारा ले रहे हैं? Report में बड़ा दावा
ईरान संघर्ष के बाद अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार (SPR) से बड़े पैमाने पर तेल निकाला जा रहा है, जबकि कभी डोनाल्ड ट्रंप ने इसी मुद्दे पर जो बाइडेन की आलोचना की थी।
अमेरिका के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) को लेकर एक बार फिर राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज हो गई है। एक नई रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ जारी तनाव और वैश्विक तेल आपूर्ति पर पड़ रहे दबाव के बीच अमेरिका अपने आपातकालीन तेल भंडार से लगातार तेल निकाल रहा है। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कभी इसी तरह के कदम के लिए जो बाइडेन प्रशासन की कड़ी आलोचना की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से अमेरिका के रणनीतिक तेल भंडार से लगभग 5 करोड़ बैरल तेल निकाला जा चुका है। इसका उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों को नियंत्रित रखना और वैश्विक सप्लाई में आई कमी की भरपाई करना बताया जा रहा है।
रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व अमेरिका का आपातकालीन तेल भंडार है, जिसे किसी बड़े ऊर्जा संकट या युद्ध जैसी स्थिति से निपटने के लिए बनाया गया था। यह भंडार टेक्सास और लुइज़ियाना में भूमिगत भंडारण केंद्रों में रखा जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, ईरान और पश्चिमी देशों के बीच बढ़ते तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। खासकर होरमुज़ जलडमरूमध्य में आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों को वैकल्पिक स्रोतों की तलाश करनी पड़ रही है। ऐसे में अमेरिकी तेल की मांग बढ़ी है और अमेरिका को अपने रिजर्व का इस्तेमाल करना पड़ रहा है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पिछले कुछ सप्ताहों में तेल निकासी की रफ्तार रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गई है। मौजूदा समय में अमेरिकी रणनीतिक तेल भंडार घटकर लगभग 36.5 करोड़ बैरल रह गया है, जो पिछले कई दशकों के न्यूनतम स्तरों के करीब माना जा रहा है।
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इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। राष्ट्रपति चुनाव अभियान के दौरान ट्रंप ने आरोप लगाया था कि बाइडेन प्रशासन चुनाव से पहले पेट्रोल की कीमतें कम रखने के लिए आपातकालीन तेल भंडार का इस्तेमाल कर रहा है। अब आलोचकों का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में ट्रंप समर्थित नीतियां भी उसी रास्ते पर चलती नजर आ रही हैं।

ऊर्जा बाजार के जानकारों का मानना है कि रिजर्व से तेल निकालना तत्काल राहत तो दे सकता है, लेकिन भविष्य में इन भंडारों को फिर से भरना पड़ेगा। इससे आने वाले समय में तेल की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि यदि वैश्विक आपूर्ति संकट लंबा चला और अमेरिका ने अपने भंडारों का इस्तेमाल जारी रखा, तो भविष्य में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े नए सवाल खड़े हो सकते हैं।
फिलहाल अमेरिका सरकार का कहना है कि वह घरेलू उपभोक्ताओं और वैश्विक बाजार दोनों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कदम उठा रही है। हालांकि तेल भंडार में लगातार गिरावट ने ऊर्जा विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं की चिंता जरूर बढ़ा दी है।
