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भारत की रसोई से जोड़ा गया Hormuz Project Freedom, अमेरिका ने बताया मानवीय मिशन

अमेरिका का दावा—होर्मुज़ जलडमरूमध्य खोलना भारत की LPG जरूरतों और वैश्विक सप्लाई चेन के लिए बेहद जरूरी

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होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गुजरते व्यापारिक जहाज, जिनकी सुरक्षा को लेकर अमेरिका चला रहा है Project Freedom
होर्मुज़ जलडमरूमध्य में अमेरिकी मिशन को भारत की LPG आपूर्ति से जोड़ते हुए बड़ा बयान

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका ने अपने चर्चित Project Freedom को लेकर बड़ा बयान दिया है। अमेरिका के ट्रेजरी सचिव Scott Bessent ने इस मिशन को मानवीय प्रयास बताते हुए कहा है कि इसका सीधा संबंध भारत जैसे देशों की रोजमर्रा की जरूरतों से है।

उन्होंने दावा किया कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे जहाजों को सुरक्षित रास्ता देने का यह कदम सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन को बचाने की कोशिश है।

भारत की रसोई तक पहुंचा होर्मुज़ संकट

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि इस जलमार्ग से केवल कच्चा तेल ही नहीं गुजरता, बल्कि LPG, खाद और खाद्य सामग्री जैसी जरूरी वस्तुएं भी दुनिया के कई देशों तक पहुंचती हैं।

उन्होंने खासतौर पर भारत का जिक्र करते हुए कहा कि एक अरब से अधिक भारतीय नागरिक खाना पकाने के लिए LPG पर निर्भर हैं, ऐसे में इस आपूर्ति में रुकावट सीधे करोड़ों परिवारों को प्रभावित कर सकती है।

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उनका यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि भारत दुनिया के सबसे बड़े LPG उपभोक्ताओं में से एक है।

क्या है Project Freedom?

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा घोषित Project Freedom का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में फंसे व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना है।

यह मिशन ऐसे समय में शुरू किया गया है जब ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ रहा है और इस रणनीतिक जलमार्ग पर आवाजाही प्रभावित हुई है।

अमेरिका का कहना है कि यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को सामान्य बनाए रखने के लिए जरूरी है।

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ईरान पर अमेरिका का बड़ा हमला

स्कॉट बेसेंट ने ईरान पर तीखा हमला बोलते हुए दावा किया कि ईरान की सैन्य क्षमता अब कमजोर पड़ चुकी है।

उन्होंने कहा कि ईरानी नौसेना अब एक संगठित सैन्य बल नहीं, बल्कि “समुद्री डाकुओं के समूह” जैसी स्थिति में पहुंच गई है।

बेसेंट के मुताबिक, ईरान अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को बाधित करने की कोशिश कर रहा है, जबकि अमेरिका उसे फिर से खोलने की दिशा में काम कर रहा है।

चीन पर भी साधा निशाना

अमेरिकी ट्रेजरी सचिव ने इस पूरे मामले में चीन को भी घेरा।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य में गुजरते व्यापारिक जहाज, जिनकी सुरक्षा को लेकर अमेरिका चला रहा है Project Freedom


उन्होंने आरोप लगाया कि China ईरान से बड़ी मात्रा में ऊर्जा खरीदकर उसे आर्थिक समर्थन दे रहा है।

बेसेंट का दावा है कि चीन ईरान की लगभग 90 प्रतिशत ऊर्जा खरीद करता है, जिससे उसे आर्थिक ताकत मिलती है।

यह बयान अमेरिका-चीन तनाव को भी एक नया आयाम दे सकता है।

ईरान की अर्थव्यवस्था पर संकट?

बेसेंट ने दावा किया कि ईरान की अर्थव्यवस्था तेजी से गिरावट की ओर बढ़ रही है।

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उन्होंने कहा कि ईरान की सेना और सरकारी तंत्र पर इसका असर दिखने लगा है और लंबे समय तक ऐसी स्थिति बनी रही तो देश के भीतर असंतोष बढ़ सकता है।

हालांकि, ईरान की ओर से इन दावों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह मामला?

भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है।

अगर होर्मुज़ जलडमरूमध्य में व्यापारिक गतिविधियां बाधित होती हैं, तो इसका असर भारत में LPG सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल और अन्य जरूरी ऊर्जा उत्पादों की कीमतों पर पड़ सकता है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबा खिंचता है, तो भारतीय बाजार में भी इसका असर देखने को मिल सकता है।

आगे क्या?

फिलहाल अमेरिका अपने मिशन को मानवीय प्रयास बता रहा है, जबकि कई विश्लेषक इसे रणनीतिक दबाव की नीति मान रहे हैं।

दुनिया की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि क्या होर्मुज़ जलडमरूमध्य में हालात सामान्य होंगे या यह तनाव और गहराएगा।

भारत समेत कई देशों के लिए यह सिर्फ भू-राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ा सवाल बन चुका है।