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3 अमेरिकी राष्ट्रपति ठुकरा चुके थे Benjamin Netanyahu का ईरान युद्ध प्लान, फिर क्यों बदला खेल?
पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी का बड़ा खुलासा – ओबामा, बुश और बाइडेन ने शांति को दी प्राथमिकता, युद्ध से किया इनकार
अमेरिका और मध्य-पूर्व की राजनीति एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन इस बार वजह है एक चौंकाने वाला खुलासा। अमेरिका के पूर्व विदेश मंत्री John Kerry ने हाल ही में एक इंटरव्यू में बताया कि इजराइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने कई बार ईरान के खिलाफ युद्ध का प्रस्ताव रखा, लेकिन अमेरिका के तीन पूर्व राष्ट्रपतियों ने इसे सिरे से खारिज कर दिया।
केरी के अनुसार, Barack Obama, George W. Bush और Joe Biden — तीनों नेताओं ने युद्ध की बजाय कूटनीतिक रास्ते को चुना। उन्होंने साफ कहा कि जब तक शांति के सभी विकल्प पूरी तरह खत्म न हो जाएं, तब तक युद्ध कोई समाधान नहीं हो सकता।
क्यों टाला गया युद्ध?
जॉन केरी ने बताया कि इन राष्ट्रपतियों का मानना था कि युद्ध अंतिम विकल्प होना चाहिए। उनका तर्क था कि अगर बातचीत, समझौते और अंतरराष्ट्रीय दबाव के जरिए समाधान निकल सकता है, तो हथियार उठाने की जरूरत नहीं है।
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उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने पहले भी कई युद्धों से सीख ली है। खासकर Vietnam War और Iraq War जैसे युद्धों ने यह दिखाया है कि जल्दबाजी में लिया गया सैन्य फैसला लंबे समय तक नुकसान पहुंचा सकता है।
जनता को गुमराह करने से बचना जरूरी
केरी, जो खुद वियतनाम युद्ध के दिग्गज रह चुके हैं, ने इस बात पर भी जोर दिया कि सरकारों को अपने नागरिकों को सच्चाई बतानी चाहिए। उन्होंने कहा कि युद्ध के फैसले में पारदर्शिता बेहद जरूरी है, ताकि जनता को भ्रमित न किया जाए।

ट्रंप का अलग रुख?
इस पूरे बयान में सबसे दिलचस्प बात यह रही कि केरी ने इशारों-इशारों में बताया कि Donald Trump का रुख इन तीनों राष्ट्रपतियों से अलग था। हालांकि उन्होंने सीधे तौर पर ज्यादा विस्तार नहीं दिया, लेकिन संकेत साफ हैं कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के प्रति ज्यादा आक्रामक नीति अपनाई।
क्या कहता है यह खुलासा?
यह खुलासा सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि यह दिखाता है कि अमेरिका के अंदर भी विदेश नीति को लेकर कितनी गहरी बहस होती है। जहां एक तरफ कुछ नेता सख्त कदम उठाने के पक्ष में होते हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ कूटनीति और शांति को प्राथमिकता देते हैं।
मध्य-पूर्व में पहले से ही तनाव का माहौल है और ऐसे में इस तरह के बयान आने से वैश्विक राजनीति पर भी असर पड़ सकता है। यह साफ है कि युद्ध का फैसला सिर्फ एक देश का नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की स्थिरता को प्रभावित करता है।
