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होर्मुज़ जलडमरूमध्य में US युद्धपोतों की एंट्री का दावा, ईरान ने किया इनकार
अमेरिका ने माइन क्लीयरेंस ऑपरेशन की बात कही, ईरान ने कहा—हमारी अनुमति के बिना कोई जहाज नहीं गुजर सकता
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ गया है, जहां रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज़ जलडमरूमध्य को लेकर United States और Iran के बीच तीखे आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड United States Central Command ने दावा किया है कि दो अमेरिकी नौसेना के युद्धपोतों ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुजरते हुए माइन क्लियरेंस (बारूदी सुरंग हटाने) अभियान शुरू किया है। इस मिशन का उद्देश्य समुद्री मार्ग को सुरक्षित बनाना बताया गया है।
यह ऑपरेशन ऐसे समय में हुआ है जब इस क्षेत्र में तनाव पहले से ही चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने भी कहा कि अमेरिका ने इस महत्वपूर्ण जलमार्ग को “साफ करने” की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि वैश्विक व्यापार बाधित न हो।
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CENTCOM के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर ने बयान में कहा कि इस अभियान का उद्देश्य एक “सुरक्षित मार्ग” तैयार करना है, जिसे जल्द ही समुद्री व्यापार उद्योग के साथ साझा किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि आने वाले दिनों में अतिरिक्त अमेरिकी संसाधन, जिनमें अंडरवाटर ड्रोन भी शामिल हो सकते हैं, इस मिशन का हिस्सा बन सकते हैं।
इस ऑपरेशन में अमेरिकी नौसेना के दो गाइडेड-मिसाइल डेस्ट्रॉयर शामिल बताए जा रहे हैं — USS Frank E. Peterson और USS Michael Murphy।

होर्मुज़ जलडमरूमध्य, जिसे वैश्विक तेल आपूर्ति का “गेटवे” भी कहा जाता है, दुनिया के लगभग 20% कच्चे तेल के व्यापार का प्रमुख मार्ग है। ऐसे में यहां किसी भी सैन्य गतिविधि का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि, ईरान ने अमेरिका के इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। ईरानी सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फ़ाग़ारी ने राज्य टीवी पर कहा कि अमेरिकी जहाजों के इस जलमार्ग में प्रवेश की बात पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी जहाज के गुजरने की अनुमति देने का अधिकार केवल ईरानी सशस्त्र बलों के पास है।
इसके बाद ईरान के अर्ध-सरकारी प्रसारक IRIB ने रिपोर्ट किया कि Islamic Revolutionary Guard Corps ने चेतावनी दी है कि किसी भी सैन्य जहाज के इस जलमार्ग से गुजरने पर “कड़ा जवाब” दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि ऊर्जा और वैश्विक व्यापार से भी जुड़ा हुआ है। होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर किसी भी तरह की सैन्य हलचल अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता पैदा कर सकती है।
फिलहाल दोनों देशों के दावों के बीच स्थिति स्पष्ट नहीं है, लेकिन यह साफ है कि इस क्षेत्र में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ लेता दिख रहा है।
