Connect with us

Business / Economy

UAE के बाहर निकलते ही OPEC+ का बड़ा दांव, तेल उत्पादन बढ़ाया लेकिन असली खेल कुछ और!

होर्मुज़ संकट के बीच 7 देशों ने बढ़ाया उत्पादन कोटा, बाजार को दिया स्थिरता का संदेश

Published

on

तेल उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद भी OPEC+ के सामने होर्मुज़ संकट सबसे बड़ी चुनौती
तेल उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद भी OPEC+ के सामने होर्मुज़ संकट सबसे बड़ी चुनौती

वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल के बीच OPEC+ ने एक बड़ा फैसला लिया है। संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के संगठन से बाहर निकलने के तुरंत बाद, समूह के सात प्रमुख देशों ने तेल उत्पादन कोटा बढ़ाने का ऐलान किया है।

इस फैसले को जहां एक तरफ स्थिरता का संकेत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विशेषज्ञ इसे एक रणनीतिक संदेश भी बता रहे हैं।

कितना बढ़ा उत्पादन?

OPEC+ के अनुसार, जून महीने के लिए कुल उत्पादन में 188,000 बैरल प्रतिदिन की बढ़ोतरी की जाएगी।

यह कदम पहले से ही अनुमानित था, क्योंकि मार्च और अप्रैल में भी उत्पादन बढ़ाया गया था। हालांकि, इस बार खास बात यह रही कि UAE के बाहर निकलने के बावजूद समूह ने अपने फैसले में इसका कोई जिक्र नहीं किया।

UAE का बाहर निकलना और साइलेंट रिएक्शन

United Arab Emirates ने हाल ही में OPEC और OPEC+ से अलग होने का फैसला लिया था। यह कदम उत्पादन कोटा को लेकर लंबे समय से चल रही असहमति के बाद उठाया गया।

लेकिन OPEC+ की तरफ से आए बयान में UAE का कोई उल्लेख न होना इस बात का संकेत है कि संगठन इस मुद्दे को ज्यादा तूल नहीं देना चाहता।

क्या असल में बढ़ेगा तेल उत्पादन?

विशेषज्ञों का मानना है कि कागज पर उत्पादन बढ़ाने का फैसला जितना बड़ा दिख रहा है, असल में उसका असर उतना नहीं होगा।

और भी पढ़ें : कतर के ऊपर अचानक लापता हुआ अमेरिका का ‘फ्लाइंग गैस स्टेशन’, 7700 इमरजेंसी सिग्नल से मचा हड़कंप

इसकी सबसे बड़ी वजह है Strait of Hormuz में जारी तनाव।

यह जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है, लेकिन मौजूदा हालात में यहां से तेल का निर्यात बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

होर्मुज़ संकट बना बड़ी रुकावट

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष के चलते होर्मुज़ जलडमरूमध्य में आवाजाही पर असर पड़ा है।

ऐसे में भले ही उत्पादन बढ़ाया जाए, लेकिन अगर तेल बाजार तक नहीं पहुंच पा रहा, तो इसका फायदा सीमित ही रहेगा।

तेल उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद भी OPEC+ के सामने होर्मुज़ संकट सबसे बड़ी चुनौती


विशेषज्ञों की राय

Rystad Energy के विश्लेषक Jorge Leon के अनुसार, यह कदम दोहरी रणनीति का हिस्सा है।

उन्होंने कहा,
“यह केवल उत्पादन बढ़ाने का फैसला नहीं है, बल्कि यह दिखाने की कोशिश है कि OPEC+ अभी भी वैश्विक तेल बाजार को नियंत्रित करता है।”

यानि यह फैसला संदेश देने के लिए ज्यादा है, बजाय वास्तविक सप्लाई बढ़ाने के।

कौन-कौन से देश शामिल?

इस फैसले में Saudi Arabia, Russia समेत कुल सात देशों ने हिस्सा लिया।

और भी पढ़ें : 60 दिन की डेडलाइन खत्म होने को, फिर भी अमेरिका बोला ईरान से युद्ध नहीं, आखिर क्या चल रहा है पर्दे के पीछे?

इन देशों का उद्देश्य यह दिखाना है कि UAE के बाहर निकलने के बावजूद संगठन मजबूत बना हुआ है।

वैश्विक बाजार पर असर

इस फैसले का असर आने वाले दिनों में तेल की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।

हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि जब तक होर्मुज़ संकट खत्म नहीं होता, तब तक कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल है।

आगे क्या?

OPEC+ का यह कदम साफ तौर पर दिखाता है कि संगठन किसी भी हाल में अपनी पकड़ कमजोर नहीं होने देना चाहता।

लेकिन असली चुनौती जमीन पर है—जहां युद्ध, राजनीति और व्यापार के बीच तेल बाजार फंसा हुआ है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *