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तेहरान पहुंचे आसिम मुनीर, US-Iran तनाव में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका तेज़
इस्लामाबाद में असफल बातचीत के बाद नई कूटनीतिक कोशिशें, शांति समझौते की उम्मीदें फिर जगीं
मध्य-पूर्व में चल रहे तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र में आ गया है। पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ तेहरान पहुंचे हैं, जहां वे ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव को कम करने के प्रयासों में शामिल हैं।
यह दौरा ऐसे समय हुआ है जब इस्लामाबाद में हुए हालिया शांति वार्ता प्रयास सफल नहीं हो सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच कई अहम मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई, जिसके बाद बातचीत टूट गई।
इन असफल वार्ताओं के बावजूद कूटनीतिक प्रयास खत्म नहीं हुए हैं। व्हाइट हाउस और तेहरान दोनों ने संकेत दिए हैं कि बातचीत की नई प्रक्रिया जारी रह सकती है, जिसमें पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है।
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान ने खुद को एक ऐसे “ब्रिज नेशन” के रूप में पेश किया है, जो अमेरिका, ईरान, सऊदी अरब और चीन जैसे देशों के बीच संवाद स्थापित करने में सक्षम है। इस्लामाबाद का दावा है कि उसने तनाव कम करने के लिए लगातार संचार चैनल बनाए रखा है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, असफल वार्ता के बाद भी पाकिस्तान के माध्यम से दोनों पक्षों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान जारी है। वहीं अमेरिकी प्रशासन ने भी पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की है, और उसे एक “महत्वपूर्ण डिप्लोमैटिक पार्टनर” बताया है।

वार्ता में तीन प्रमुख मुद्दे सबसे बड़ी बाधा बने—ईरान का यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ से जुड़े सुरक्षा सवाल और लेबनान में चल रहा संघर्ष। ईरान ने साफ कहा है कि शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा का अधिकार उससे छीना नहीं जा सकता, हालांकि स्तर पर बातचीत संभव है।
उदाहरण के तौर पर यह स्थिति कुछ वैसी है जैसे दो पड़ोसी लंबे विवाद के बाद किसी तीसरे भरोसेमंद व्यक्ति के जरिए बातचीत करें, लेकिन मूल मुद्दों पर सहमति न बन पाए।
अब जबकि संघर्ष विराम की मौजूदा अवधि समाप्त होने वाली है, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पाकिस्तान की मध्यस्थता से कोई नया समझौता निकल पाएगा या तनाव एक बार फिर बढ़ेगा।
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