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ईरान में सत्ता पर बड़ा बदलाव? रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के नियंत्रण और “हार्डलाइन” शासन पर नए दावे तेज
इज़राइल और अमेरिकी पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद ईरान की राजनीतिक स्थिति को लेकर अंतरराष्ट्रीय तनाव और अटकलें और गहरी हुईं
मध्य पूर्व की राजनीति एक बार फिर बड़े भूचाल के संकेत दे रही है। हालिया रिपोर्टों और अंतरराष्ट्रीय बयानों के अनुसार ईरान की सत्ता संरचना को लेकर गंभीर दावे सामने आए हैं। इज़राइल ने दावा किया है कि अब ईरान का वास्तविक नियंत्रण इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के हाथों में केंद्रित होता जा रहा है, जिससे देश पहले की तुलना में कहीं अधिक “हार्डलाइन” रुख अपना रहा है।
इज़राइली अधिकारियों के अनुसार, फरवरी 28 को हुए कथित हमलों के बाद, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के मारे जाने की बात कही गई है, देश की राजनीतिक स्थिति पूरी तरह बदल गई है। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इस बयान ने वैश्विक स्तर पर हलचल जरूर पैदा कर दी है।
उधर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए दावा किया कि ईरान “एक ऐसे दौर से गुजर रहा है जिसे एक उत्पादक शासन परिवर्तन (productive regime change)” कहा जा सकता है। ट्रंप के इस बयान ने पहले से तनावपूर्ण माहौल को और अधिक राजनीतिक बहस में बदल दिया है।
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विश्लेषकों का मानना है कि अगर वास्तव में सत्ता का केंद्रीकरण रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के हाथों में बढ़ रहा है, तो इससे ईरान की घरेलू और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है। खासकर पश्चिमी देशों और खाड़ी क्षेत्र के साथ संबंध और अधिक कठोर हो सकते हैं।
कुछ राजनीतिक विशेषज्ञों ने तुलना करते हुए कहा कि यह स्थिति वैसी ही हो सकती है जैसी पहले अन्य देशों में सैन्य या अर्धसैनिक ताकतों के प्रभाव बढ़ने पर देखी गई थी—जहां निर्णय लेने की प्रक्रिया तेजी से कठोर और केंद्रीकृत हो जाती है।

हालांकि ईरान की आधिकारिक सरकार की ओर से इन दावों पर कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। कई देशों ने इस स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है, क्योंकि इसका असर वैश्विक तेल बाजार और सुरक्षा संतुलन पर भी पड़ सकता है।
फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान के भीतर वास्तविक राजनीतिक ढांचा किस दिशा में आगे बढ़ रहा है, लेकिन इतना तय है कि इस घटनाक्रम ने दुनिया की नजरें एक बार फिर तेहरान पर केंद्रित कर दी हैं।
