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Iran-US तनाव से हिला Islamabad शांति वार्ता का माहौल, Trump’s की धमकी और तेहरान की शर्तों से बढ़ी अनिश्चितता
लंदन, तेहरान और वॉशिंगटन के बीच बयानबाज़ी तेज, पाकिस्तान में होने वाली अहम शांति वार्ता ‘मेक-ऑर-ब्रेक’ मोड़ पर पहुंची
इस्लामाबाद में होने वाली ईरान और अमेरिका के बीच प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले ही कूटनीतिक माहौल बेहद तनावपूर्ण हो गया है। एक ओर जहां ईरान ने बातचीत शुरू होने से पहले कई शर्तें रख दी हैं, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कड़ी चेतावनी ने स्थिति को और अधिक जटिल बना दिया है।
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस वार्ता को “मेक-ऑर-ब्रेक” यानी निर्णायक चरण बताया है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि इस बातचीत का परिणाम केवल क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
सूत्रों के अनुसार, ईरान के वार्ताकार शुक्रवार को ही इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, लेकिन तेहरान ने बातचीत शुरू करने से पहले कुछ महत्वपूर्ण मांगें सामने रखी हैं। ईरान का कहना है कि जब तक लेबनान में संघर्षविराम लागू नहीं किया जाता और उसके जब्त किए गए आर्थिक संसाधन वापस नहीं किए जाते, तब तक औपचारिक बातचीत शुरू नहीं हो सकती।
इन शर्तों ने पहले से ही संवेदनशील चल रही कूटनीतिक प्रक्रिया को और अधिक पेचीदा बना दिया है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस समय बातचीत में दबाव बनाने की रणनीति अपना रहा है, ताकि वह अपने क्षेत्रीय और आर्थिक हितों को मजबूत स्थिति में रख सके।
दूसरी ओर, अमेरिका की तरफ से भी सख्त बयान सामने आया है। डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका “पूर्ण विनाश” जैसी कड़ी कार्रवाई कर सकता है। इस बयान ने न केवल कूटनीतिक हलकों में हलचल पैदा की है, बल्कि वैश्विक बाजारों और सुरक्षा विश्लेषकों को भी चिंता में डाल दिया है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या तय समय पर यह वार्ता हो भी पाएगी या नहीं। क्योंकि जिस तरह से दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं, उससे बातचीत शुरू होने से पहले ही उसके विफल होने की आशंका बढ़ गई है।
पाकिस्तान, जो इस वार्ता की मेजबानी कर रहा है, ने स्थिति को संभालने की कोशिश जरूर की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े भू-राजनीतिक तनाव को केवल मध्यस्थता से नियंत्रित करना आसान नहीं होगा।
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों के अनुसार, यह वार्ता केवल ईरान और अमेरिका के बीच का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसमें मध्य पूर्व की सुरक्षा, तेल बाजार की स्थिरता और वैश्विक कूटनीतिक संतुलन जैसे कई बड़े पहलू जुड़े हुए हैं।
जैसे-जैसे बातचीत का समय करीब आ रहा है, वैसे-वैसे दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर टिक गई हैं। अब देखना यह होगा कि यह “मेक-ऑर-ब्रेक” वार्ता शांति की दिशा में कोई ठोस कदम बढ़ा पाती है या फिर एक और कूटनीतिक टकराव में बदल जाती है।
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