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ईरान की चेतावनी से हड़कंप तेल की कीमतें $140 तक पहुंच सकती हैं बड़ा दावा
ईरानी संसद अध्यक्ष क़लीबाफ ने अमेरिका की आर्थिक नीतियों पर साधा निशाना, कहा गलत सलाह से बढ़े वैश्विक तेल दाम
वैश्विक ऊर्जा बाजार एक बार फिर भारी उथल-पुथल के दौर में पहुंच गया है। तेल की कीमतें जहां पहले ही 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी हैं, वहीं अब ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर क़लीबाफ के बयान ने नई बहस छेड़ दी है। क़लीबाफ ने चेतावनी दी है कि अगर मौजूदा हालात जारी रहे तो कच्चे तेल की कीमतें जल्द ही 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।
क़लीबाफ ने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर अमेरिका की आर्थिक नीतियों और वरिष्ठ अधिकारियों की सलाह को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट सहित शीर्ष अधिकारियों पर “गलत और भ्रामक आर्थिक सलाह” देने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, यही नीतियां वैश्विक बाजार में अस्थिरता पैदा कर रही हैं।
ईरानी नेता का कहना है कि जिस “आर्थिक दबाव” की रणनीति को पश्चिमी देश प्रभावी मान रहे थे, वह उल्टा असर डाल रही है। इसके बजाय यह रणनीति तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ा रही है और कीमतों को और ऊपर धकेल रही है।
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तेल बाजार में क्यों बढ़ रही है कीमतें?
विशेषज्ञों के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में हालिया उछाल के पीछे कई कारण हैं। मध्य पूर्व में तनाव, उत्पादन पर सीमाएं, और वैश्विक मांग में तेजी प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। इसके अलावा कुछ बड़े तेल उत्पादक देशों द्वारा उत्पादन में कटौती ने भी बाजार को प्रभावित किया है।
अगर हम पिछले कुछ वर्षों को देखें, तो 2020 के महामारी काल में तेल की कीमतें ऐतिहासिक रूप से नीचे गिर गई थीं। लेकिन 2022 के बाद से इसमें लगातार तेजी देखने को मिली है। कई बार कीमतें 100 डॉलर के पार भी चली गईं, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन गईं।

आम जनता पर असर
तेल की बढ़ती कीमतों का सीधा असर आम लोगों की जिंदगी पर पड़ता है। चाहे पेट्रोल-डीजल के दाम हों या ट्रांसपोर्ट और खाद्य वस्तुओं की कीमतें—हर चीज महंगी हो जाती है। भारत जैसे आयात-निर्भर देशों के लिए यह स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो जाती है।
अगर कीमतें 140 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती हैं, तो विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई की एक नई लहर देखने को मिल सकती है। इसका असर घरेलू बजट से लेकर वैश्विक व्यापार तक महसूस किया जाएगा।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल बाजार अस्थिर बना हुआ है। निवेशक और देश दोनों ही स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। ओपेक देशों की अगली बैठक और वैश्विक राजनीतिक घटनाक्रम आने वाले समय में तेल की दिशा तय करेंगे।
क़लीबाफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब दुनिया पहले ही आर्थिक दबाव, युद्ध और आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं से जूझ रही है। ऐसे में तेल की कीमतों में कोई भी बड़ा बदलाव वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।

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