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ट्रंप का बड़ा ऐलान: अभी खत्म नहीं होगी जंग, ईरान भी अड़ा—न्यूक्लियर और होर्मुज़ पर टकराव तेज

सीज़फायर की उम्मीदों को झटका, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत ठप; दोनों पक्ष अपनी शर्तों पर कायम

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Trump Rejects Early End To Iran War, Tensions Rise Over Nuclear And Hormuz Issues
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच ट्रंप और ईरानी नेतृत्व के सख्त बयान

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहराता दिख रहा है। Donald Trump ने साफ कर दिया है कि फिलहाल जंग के जल्द खत्म होने की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने ईरान के प्रस्तावों को खारिज करते हुए कहा कि वह इनसे “संतुष्ट नहीं” हैं।

हालांकि हाल के दिनों में बैकचैनल बातचीत की खबरें सामने आई थीं, लेकिन अब स्थिति फिर से सख्त हो गई है। ट्रंप ने कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, लेकिन अमेरिका उसकी शर्तों को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।

ईरान का सख्त रुख

दूसरी तरफ, ईरान भी अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं है। ईरानी संसद के उपाध्यक्ष Ali Nikzad ने साफ कहा है कि उनका देश अपने परमाणु कार्यक्रम और Strait of Hormuz पर किसी भी तरह की बातचीत नहीं करेगा।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका ही बातचीत से पीछे हट रहा है, क्योंकि ईरान ने इन मुद्दों पर झुकने से इनकार कर दिया है।

10 सूत्रीय प्रस्ताव भी ठुकराया

ईरान की तरफ से एक 10-पॉइंट प्रस्ताव रखा गया था, जिसमें:

  • अमेरिका द्वारा लगाए गए प्रतिबंध हटाने
  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर ईरान के नियंत्रण को मान्यता देने
  • सैन्य ठिकानों को हटाने
    जैसी मांगें शामिल थीं।

लेकिन अमेरिका ने इस पूरे प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया।

कानूनी समयसीमा पर भी सवाल

इस बीच एक और दिलचस्प पहलू सामने आया है। अमेरिका में कानून के मुताबिक, 60 दिनों के भीतर युद्ध को जारी रखने के लिए राष्ट्रपति को कानूनी मंजूरी लेनी होती है।

हालांकि व्हाइट हाउस ने दावा किया कि चूंकि फिलहाल “सीज़फायर जैसी स्थिति” है, इसलिए इस मंजूरी की जरूरत नहीं है। इस बयान ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी है।

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क्या बढ़ेगा तनाव?

विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • होर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है
  • अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो दुनिया भर में ईंधन की कीमतें प्रभावित हो सकती हैं
  • दोनों देशों के सख्त रुख से हालात और बिगड़ सकते हैं

इस बीच, आम लोगों और बाजारों की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या आने वाले दिनों में कोई नया कूटनीतिक रास्ता निकलता है या टकराव और गहराता है।

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