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Trump के 10% ग्लोबल टैरिफ पर कोर्ट से मिली बड़ी राहत अमेरिकी अपील अदालत ने रोक दिया फैसला
Donald Trump की वैश्विक टैरिफ नीति को अवैध बताने वाले फैसले पर फिलहाल लगी रोक, मामला अब ऊपरी अदालतों तक पहुंच सकता है
अमेरिका में एक बार फिर Donald Trump की आर्थिक नीतियां चर्चा के केंद्र में हैं। इस बार मामला उनके द्वारा लगाए गए 10 प्रतिशत ग्लोबल टैरिफ को लेकर है। अमेरिकी फेडरल अपील अदालत ने उस फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है जिसमें निचली अदालत ने इन टैरिफ को अवैध करार दिया था।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब अमेरिका में व्यापार, आयात शुल्क और वैश्विक आर्थिक रणनीति को लेकर बहस तेज हो चुकी है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, फरवरी 2025 में Donald Trump ने कई देशों से आने वाले सामान पर अस्थायी तौर पर 10 प्रतिशत का वैश्विक टैरिफ लगाया था। यह कदम उस समय उठाया गया जब अमेरिकी Supreme Court ने Trump प्रशासन के कई पुराने टैरिफ फैसलों को रद्द कर दिया था।
Trump का कहना था कि यह कदम अमेरिकी उद्योगों और नौकरियों की सुरक्षा के लिए जरूरी है। लेकिन कई कंपनियों और राज्यों ने इस फैसले को अदालत में चुनौती दे दी।
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निचली अदालत ने बताया था अवैध
7 मई को अमेरिकी Court of International Trade (CIT) ने बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा कि Trump द्वारा लगाए गए ये टैरिफ कानूनी रूप से सही नहीं हैं। अदालत ने इन टैरिफ को दो कंपनियों और Washington State के खिलाफ लागू करने से रोक दिया था।
यह आदेश मंगलवार से लागू होने वाला था, लेकिन उससे पहले ही Trump प्रशासन ने ऊपरी अदालत का दरवाजा खटखटा दिया।
अपील कोर्ट ने फिलहाल दी राहत
अब अमेरिकी Court of Appeals for the Federal Circuit ने निचली अदालत के फैसले पर अस्थायी रोक लगा दी है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल Trump के टैरिफ जारी रह सकते हैं, जब तक कि अपील प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
अपील अदालत ने दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें पेश करने के लिए समयसीमा भी तय की है।
Trump प्रशासन ने अदालत में कहा कि CIT का फैसला जल्दबाजी में लिया गया और सरकार को पूरा कानूनी विकल्प इस्तेमाल करने का मौका मिलना चाहिए। प्रशासन ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर मामला दोबारा Supreme Court तक ले जाया जा सकता है।

Trump के 10% ग्लोबल टैरिफ पर कोर्ट से राहत अमेरिकी अपील अदालत ने फैसले पर लगाई रोक
अमेरिकी व्यापार नीति पर असर
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक टैरिफ विवाद नहीं बल्कि अमेरिका की पूरी व्यापार नीति से जुड़ा हुआ है। अगर Trump प्रशासन अदालत में जीत हासिल करता है तो भविष्य में अमेरिकी राष्ट्रपति अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर ज्यादा आक्रामक फैसले ले सकते हैं।
वहीं विरोध करने वाले पक्ष का कहना है कि ऐसे टैरिफ से आम अमेरिकी उपभोक्ताओं पर महंगाई का बोझ बढ़ सकता है और वैश्विक व्यापार संबंध भी प्रभावित हो सकते हैं।
चीन और दूसरे देशों पर भी नजर
Trump पहले भी चीन और कई अन्य देशों पर भारी टैरिफ लगाने को लेकर चर्चा में रहे हैं। उनका मानना रहा है कि दूसरे देश अमेरिका के व्यापारिक हितों का फायदा उठाते रहे हैं और टैरिफ के जरिए इस असंतुलन को ठीक किया जा सकता है।
हालांकि आलोचक कहते हैं कि टैरिफ युद्ध से वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ती है और कंपनियों की लागत भी बढ़ जाती है।
चुनावी माहौल में बढ़ेगी बहस
अमेरिका में चुनावी माहौल के बीच यह मामला राजनीतिक रूप से और ज्यादा अहम हो गया है। रिपब्लिकन समर्थक इसे अमेरिकी उद्योगों की सुरक्षा का कदम बता रहे हैं, जबकि डेमोक्रेटिक नेता इसे आर्थिक जोखिम मान रहे हैं।
फिलहाल सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि आगे की सुनवाई में अदालत क्या फैसला देती है और क्या यह मामला दोबारा अमेरिकी Supreme Court तक पहुंचता है।
