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क्या यह एक भोली भूल थी या शातिर साजिश? भारतीय-अमेरिकी विद्वान Ashley J. Tellis पर जासूसी का गंभीर आरोप
अमेरिका की जाँच एजेंसियों ने पाया 1,000 से अधिक गोपनीय दस्तावेज़, लेकिन प्रसिद्ध रणनीतिक विशेषज्ञ Ashley J. Tellis के वकीलों का दावा– “यह विद्वानों की जिज्ञासा थी, साजिश नहीं।”
वाशिंगटन डी.सी. के उपनगर वर्जीनिया में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञ Ashley J. Tellis पर इन दिनों अमेरिका में सुर्खियों की बौछार है। जिन्हें लंबे समय से दक्षिण एशिया और भारत-अमेरिका संबंधों पर गहरी समझ रखने वाले विद्वान के रूप में जाना जाता था, उन पर अब जासूसी (Espionage) के गंभीर आरोप लगे हैं।
Federal Bureau of Investigation (FBI) के अनुसार, टेलिस के घर से 1,000 से अधिक गोपनीय दस्तावेज़ बरामद किए गए हैं — जिन पर “Top Secret” और “Secret” का दर्जा लिखा हुआ था। एजेंसी ने दावा किया कि उन्होंने चीन के अधिकारियों से मुलाकात की थी और एक “लाल उपहार बैग” (Red Gift Bag) भी प्राप्त किया।
हालांकि, Ashley Tellis और उनके वकीलों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनके अनुसार, यह मामला “जासूसी नहीं बल्कि अकादमिक जिज्ञासा” का है।
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उनके वकील John Nassikas और Deborah Curtis ने कोर्ट में कहा —
“Any insinuation that Dr Tellis has disclosed classified information – let alone to a foreign government – lacks any evidentiary basis.”
उनका तर्क है कि लाल बैग में केवल “चाय” थी, जो एशियाई संस्कृति में एक सामान्य उपहार होता है। वहीं मनीला लिफाफे में उनके द्वारा लिखा गया कोई शोध लेख (research paper) हो सकता है, जिसे वह अक्सर अपने संपर्कों को देते थे।
Ashley Tellis का करियर और पहचान
Ashley J. Tellis का जन्म भारत में हुआ और बाद में वे अमेरिका चले गए। उन्होंने लंबे समय तक Carnegie Endowment for International Peace में सीनियर फेलो के रूप में काम किया, जहाँ उनका फोकस अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा (International Security) और एशियाई रणनीति (Asian Strategy) पर रहा।

उन्होंने पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति George W. Bush के प्रशासन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और अमेरिका-भारत परमाणु समझौते (US-India Nuclear Deal) जैसे अहम नीति-निर्णयों में योगदान दिया। टेलिस कई बार US State Department के सलाहकार के रूप में भी काम कर चुके हैं।
कोर्ट में बहस और निर्णय
वर्जीनिया की अदालत ने Ashley Tellis को ट्रायल से पहले रिहाई की मंज़ूरी दी है, लेकिन सख्त शर्तों के साथ।
- $1.5 मिलियन डॉलर की बॉन्ड राशि
- घर पर नज़रबंदी (Home Confinement)
- पासपोर्ट जमा करने की शर्त
- यात्रा और इंटरनेट पर नियंत्रण
अदालत में बचाव पक्ष ने कहा कि जांच एजेंसियों ने “विद्वान की सामान्य पेशेवर गतिविधियों” को गलत तरीके से गुप्तचर (spy) गतिविधि के रूप में देखा है।
The Washington Post और The New York Times की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बचाव पक्ष ने इसे “overzealous counterintelligence” कहा — यानी एक ऐसी जांच जो अत्यधिक आक्रामक और गलत व्याख्या पर आधारित है।
क्या यह अमेरिका-चीन तनाव का परिणाम है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यह पूरा मामला सिर्फ Ashley Tellis तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अमेरिका-चीन के बढ़ते तनाव का प्रतीक भी है। हाल के वर्षों में अमेरिकी एजेंसियाँ चीन से जुड़े किसी भी संभावित संबंध पर बेहद सतर्क हो गई हैं।
Joe Biden प्रशासन ने भी चीन से संबंधित साइबर जासूसी और अकादमिक घुसपैठ के मामलों पर नकेल कसने के लिए कई सख्त नीतियाँ बनाई हैं। ऐसे में, किसी भी एशिया-विशेषज्ञ विद्वान पर संदेह की सुई उठना स्वाभाविक है।
भारत के लिए मायने
भारत के लिए यह मामला कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। Ashley Tellis लंबे समय से भारत-अमेरिका रक्षा संबंधों के प्रमुख थिंक-टैंक चेहरों में से एक रहे हैं। उन्होंने Narendra Modi सरकार और अमेरिकी प्रशासन के बीच नज़दीकी को मजबूत करने में वैचारिक योगदान दिया था।
अगर यह मामला लम्बा खिंचता है, तो यह भारत-अमेरिका सामरिक संवाद को लेकर नई चुनौतियाँ पैदा कर सकता है। वहीं भारतीय नीति-विश्लेषक यह भी देख रहे हैं कि अमेरिका में भारतीय-मूल विद्वानों की बढ़ती भूमिका पर अब कितनी गहरी जाँच-पड़ताल की जा रही है।
अब आगे क्या?
Ashley Tellis को फिलहाल घर से बाहर जाने पर प्रतिबंध है, लेकिन उनके वकील आश्वस्त हैं कि वे सभी आरोपों से बरी हो जाएंगे। मामला फिलहाल Virginia District Court में विचाराधीन है, और अमेरिकी मीडिया इसे “Test Case” के रूप में देख रहा है — यानी ऐसा केस जो आने वाले समय में “विद्वान और जासूस” की सीमाओं को परिभाषित कर सकता है।
