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चीन और पाकिस्तान मिलकर बना रहे हैं ऐसी मिसाइलें जो सीधे America को निशाना बना सकती हैं — अमेरिकी खुफिया एजेंसी की चेतावनी

अमेरिका के Intelligence Chief ने Congress में खुलासा किया कि Beijing की मदद से Islamabad एक ऐसी लंबी दूरी की परमाणु मिसाइल तैयार कर रहा है जो Washington D.C. तक पहुँच सकती है।

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अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने Congress में खुलासा किया कि China की मदद से Pakistan एक अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक पहुँचने में सक्षम होगी।
अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने Congress में खुलासा किया कि China की मदद से Pakistan एक अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक पहुँचने में सक्षम होगी।

दुनिया में परमाणु हथियारों की दौड़ एक बार फिर तेज हो गई है। इस बार खबर सिर्फ किसी रिपोर्ट या अंदाजे की नहीं, बल्कि सीधे अमेरिका के शीर्ष खुफिया अधिकारी के मुँह से आई है। अमेरिकी Intelligence Chief ने हाल ही में यह चौंकाने वाला खुलासा किया कि China और Pakistan मिलकर एक ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल विकसित कर रहे हैं, जो अमेरिका की मुख्य भूमि तक सीधे हमला करने में सक्षम होगी।

क्या है पूरा मामला?

अमेरिका के तत्कालीन Principal Deputy National Security Advisor Jonathan Finer ने Washington D.C. में एक बड़े कार्यक्रम में बयान दिया कि Pakistan ने “तेजी से परिष्कृत मिसाइल तकनीक” विकसित की है। अमेरिकी State Department ने अप्रैल और सितंबर 2024 में Pakistan के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम को सामग्री आपूर्ति करने वाली कई चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध भी लगाए।

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Finer ने यह भी कहा कि Pakistan द्वारा बड़े रॉकेट इंजन बनाने की कोशिश इस बात का संकेत है कि वह अब एक अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल यानी ICBM बना रहा है। उनके शब्दों में, जो देश “परमाणु हथियार और अमेरिका की मुख्य भूमि तक मारने की क्षमता” रखते हैं, वे आमतौर पर अमेरिका के विरोधी होते हैं। ऐसे में Pakistan की इस हरकत को “एक उभरता हुआ खतरा” बताना स्वाभाविक है।

Pakistan की सबसे बड़ी मिसाइल कितनी दूर मार सकती है?

Pakistan की सबसे लंबी दूरी की मिसाइल अभी Shaheen-III है, जिसे पहली बार 2015 में टेस्ट किया गया था और इसकी अनुमानित मारक क्षमता करीब 2,750 किलोमीटर है। लेकिन अगर Pakistan ICBM बना लेता है, तो उसकी रेंज 5,500 किलोमीटर या उससे भी ज्यादा हो सकती है — यानी सीधे New York या Washington D.C. तक। यह ऐसा ही होगा जैसे किसी ने Moradabad से बैठकर दिल्ली नहीं, बल्कि London को निशाना साधने का इरादा बना लिया हो।

China की भूमिका कितनी पुरानी है?

Pakistan का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम 1980 के दशक में शुरू हुआ था, जिसमें China और North Korea की मदद मिली थी। दशकों से Beijing ने Islamabad को न सिर्फ परमाणु तकनीक बल्कि मिसाइल डिजाइन में भी सहयोग दिया है। यह रिश्ता वैसा ही है जैसे कोई बड़ा भाई छोटे को पूरी तरह अपना हथियार देकर खड़ा कर दे — लेकिन अपना नाम सामने न आने दे।

China खुद कितनी तेजी से परमाणु शक्ति बढ़ा रहा है?

China अभी दुनिया में सबसे तेजी से अपना परमाणु जखीरा बढ़ाने वाला देश है। अनुमान है कि उसके पास अब लगभग 600 परमाणु हथियार हैं और यह संख्या और बढ़ रही है। इसके अलावा China अब ऐसी नई पीढ़ी के परमाणु हथियार बना रहा है जो एक ही मिसाइल से कई छोटे-छोटे परमाणु वारहेड गिरा सकें। यह तकनीक MIRV कहलाती है — यानी एक मिसाइल, कई शहर।

अमेरिकी खुफिया अधिकारी ने Congress में खुलासा किया कि China की मदद से Pakistan एक अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइल विकसित कर रहा है जो अमेरिका तक पहुँचने में सक्षम होगी।


Pakistan का पक्ष क्या है?

Pakistan ने इन सभी आरोपों को सिरे से नकार दिया है। Pakistan के विदेश मंत्रालय ने दिसंबर 2024 में कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम “पूरी तरह रक्षात्मक” है और America या किसी अन्य देश के खिलाफ नहीं है। Pakistan की सेना ने भी मई 2025 में कहा था कि उनकी परमाणु क्षमता “केवल रक्षा के लिए” है। लेकिन दुनिया जानती है कि जब कोई देश हजारों किलोमीटर दूर तक मारने वाली मिसाइल बना रहा हो, तो “रक्षात्मक” का दायरा बहुत अजीब लगता है।

भारत के लिए इसका क्या मतलब है?

यह सब सिर्फ America की चिंता का विषय नहीं है। भारत के नजरिए से देखें तो Pakistan का परमाणु जखीरा पहले से ही भारत को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। Pakistan की परमाणु नीति “Full Spectrum Deterrence” है, जिसमें वह किसी भी हमले की स्थिति में अपने सभी हथियारों का इस्तेमाल करने का अधिकार रखता है। ऐसे में जब Pakistan और China दोनों एक साथ अपनी मिसाइल क्षमता बढ़ा रहे हों, तो यह पूरे एशिया की सुरक्षा के लिए एक गंभीर सवाल है।

अमेरिका अब क्या करेगा?

अमेरिका के जानकारों का मानना है कि पुराना हथियार नियंत्रण ढांचा अब टूट रहा है क्योंकि China अपने परमाणु हथियारों की संख्या तेजी से बढ़ा रहा है। जब तक कोई ऐसा समझौता नहीं होता जिसमें China भी शामिल हो, तब तक यह दौड़ रुकने वाली नहीं है

यह पूरा घटनाक्रम दुनिया को Cold War के उस दौर की याद दिलाता है जब America और Soviet Union के बीच परमाणु हथियारों की होड़ पूरी दुनिया को डरा देती थी। फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार खिलाड़ी बदल गए हैं।

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