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Hormuz Strait पर नया नियम? ईरान बोला- रास्ता खुला रहेगा, लेकिन जहाजों को देनी पड़ सकती है फीस
ईरान के मॉस्को स्थित राजदूत ने संकेत दिया है कि Hormuz Strait भविष्य में खुला रहेगा, लेकिन वहां से गुजरने वाले जहाजों पर नई शर्तें और संभावित ट्रांजिट फीस लागू की जा सकती है। इस प्रस्ताव ने वैश्विक तेल व्यापार और समुद्री परिवहन को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल Hormuz Strait एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा का केंद्र बन गया है। ईरान ने संकेत दिया है कि यह जलमार्ग भविष्य में खुला रहेगा, लेकिन वहां से गुजरने वाले जहाजों को नई शर्तों का पालन करना पड़ सकता है। इनमें ट्रांजिट फीस भी शामिल हो सकती है।
ईरान के मॉस्को स्थित राजदूत Kazem Jalali ने एक इंटरव्यू में कहा कि Hormuz Strait पूरी तरह बंद नहीं किया जाएगा, लेकिन इसके संचालन और उपयोग से जुड़ी नई व्यवस्थाएं ईरान और ओमान की ओर से तय की जा सकती हैं।
क्या है Hormuz Strait और क्यों है इतना महत्वपूर्ण?
Hormuz Strait फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला एक रणनीतिक समुद्री मार्ग है। दुनिया के कुल तेल व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा इस मार्ग से दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में होने वाला कोई भी बदलाव सीधे अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।
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ईरान ने क्या कहा?
राजदूत Kazem Jalali के अनुसार, ईरान और ओमान इस समुद्री मार्ग पर विभिन्न प्रकार की सेवाएं उपलब्ध कराते हैं। उनका कहना है कि इन सेवाओं के लिए शुल्क लिया जाना स्वाभाविक है।
हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि फीस कितनी होगी या इसे किस आधार पर तय किया जाएगा। लेकिन रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान का मानना है कि किसी स्थायी शांति समझौते की स्थिति में उसे इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार मिलना चाहिए।
किस आधार पर तय हो सकती है फीस?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित ट्रांजिट फीस जहाज के प्रकार, उसके माल और उस समय की परिस्थितियों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
यदि ऐसा होता है तो तेल टैंकर, गैस वाहक जहाज और अन्य व्यावसायिक पोत अलग-अलग दरों के तहत शुल्क का भुगतान कर सकते हैं।
हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है।
अमेरिका का कड़ा विरोध
ईरान के इस विचार को लेकर अमेरिका पहले ही अपनी असहमति जता चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump प्रशासन ने पहले भी ऐसे किसी प्रयास का विरोध किया था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने से वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
अमेरिका ने ओमान को भी इस मुद्दे पर सावधानी बरतने की सलाह दी थी। वहीं कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया था कि ओमान की ओर से ऐसे किसी शुल्क की योजना नहीं बनाई जा रही है।

तेल बाजार पर पड़ सकता है असर
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि Hormuz Strait से गुजरने वाले जहाजों पर अतिरिक्त शुल्क लागू किया जाता है, तो इसका असर वैश्विक तेल कीमतों पर पड़ सकता है।
क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने की स्थिति में तेल और गैस की आपूर्ति महंगी हो सकती है, जिसका प्रभाव कई देशों की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिल सकता है।
युद्ध और तनाव के बीच बढ़ी चिंता
हाल के महीनों में क्षेत्रीय तनाव और सैन्य गतिविधियों के कारण इस समुद्री मार्ग पर पहले ही दबाव बढ़ा है। कई जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।
ऐसे समय में ईरान का यह बयान वैश्विक व्यापार जगत और ऊर्जा बाजार के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
आगे क्या होगा?
फिलहाल Hormuz Strait को लेकर कोई अंतिम नीति घोषित नहीं की गई है। लेकिन ईरान की ओर से आए इस संकेत ने दुनिया भर के नीति निर्माताओं, ऊर्जा कंपनियों और शिपिंग उद्योग का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
अब सभी की नजर इस बात पर है कि ईरान और ओमान भविष्य में क्या नियम तय करते हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस प्रस्ताव पर कैसी प्रतिक्रिया देता है।
यदि नई शर्तें लागू होती हैं, तो इसका असर केवल क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और समुद्री व्यापार पर भी महसूस किया जा सकता है।

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