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ट्रंप ने ईरान को दी 5 दिन की मोहलत — लेकिन तेहरान बोला: “कोई बात ही नहीं हुई”, अब दुनिया सांस रोककर देख रही है क्या होगा आगे…
तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं, खाड़ी देशों पर मिसाइलें बरस रही हैं, इज़राइल में तबाही मच रही है — और वाशिंगटन और तेहरान इस बात पर भी सहमत नहीं कि वो आपस में बात कर रहे हैं या नहीं।
यह युद्ध के चौथे हफ्ते की शुरुआत थी — और दुनिया के सामने एक ऐसा विरोधाभास खड़ा था जो किसी थ्रिलर फिल्म की पटकथा से कम नहीं लगता। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “बेहद अच्छी और नतीजेदार बातचीत” का दावा कर रहे थे। दूसरी तरफ ईरान कह रहा था — कोई बातचीत हुई ही नहीं। न सीधी, न परोक्ष।
दो परमाणु-सक्षम शक्तियां। एक सक्रिय युद्ध। और वे इस पर भी एकमत नहीं कि वे बात कर रहे हैं या नहीं।
होर्मुज़ जलडमरूमध्य: वो तंग रास्ता जो दुनिया का गला घोंट रहा है
इस पूरे संकट के केंद्र में है होर्मुज़ जलडमरूमध्य — ईरान और ओमान के बीच का वो संकरा समुद्री मार्ग जिससे हर रोज़ दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल आपूर्ति गुज़रती है। अमेरिका-इज़राइल के हमले के बाद ईरान ने इस जलमार्ग को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है — और इसके नतीजे पूरी दुनिया भुगत रही है।
अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक फातिह बिरोल ने ऑस्ट्रेलिया के नेशनल प्रेस क्लब में दिए अपने संबोधन में साफ़ शब्दों में कहा कि पश्चिम एशिया की यह स्थिति “बेहद गंभीर” है — और 1970 के दशक के दोनों ऊर्जा संकटों को मिलाकर भी यह उनसे बदतर है। उनके अनुसार, सबसे बड़ा और सबसे तत्काल समाधान एक ही है: होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोला जाए।
ट्रंप — जो देश में बढ़ती तेल कीमतों को लेकर घरेलू दबाव झेल रहे हैं — ने सप्ताहांत में अपने फ्लोरिडा आवास से सोशल मीडिया पर एक कड़ा अल्टीमेटम जारी किया था: 48 घंटे के भीतर होर्मुज़ को पूरी तरह खोलो — वरना ईरान के बिजलीघर “तबाह” कर दिए जाएंगे। सोमवार को जो पाँच दिन की मोहलत मिली, वो उसी अल्टीमेटम का विस्तार है। लेकिन क्या यह सच्ची कूटनीति है या महज़ देरी — यह अभी तक साफ़ नहीं है।
ईरानी मिसाइलों ने दक्षिणी इज़राइल को हिलाया
कूटनीतिक बयानबाज़ी के बीच ज़मीन पर जंग जारी रही। शनिवार की देर रात ईरानी मिसाइलों ने दक्षिणी इज़राइल के दो इलाकों पर हमला किया — इमारतें ध्वस्त हुईं, दर्जनों लोग घायल हुए। और ये हमले इज़राइल के मुख्य परमाणु अनुसंधान केंद्र दिमोना के पास हुए — एक तथ्य जिसे कोई भी नज़रअंदाज़ नहीं कर सका।
तेहरान ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था: अगर अमेरिका ने ईरानी ऊर्जा ढांचे पर हमला किया, तो जवाब में अमेरिकी और इज़राइली ऊर्जा संपत्तियों को निशाना बनाया जाएगा। दक्षिणी इज़राइल पर हमले यह बताते हैं कि ईरान अपनी इस धमकी को अमल में लाने के लिए पूरी तरह तैयार है।
खाड़ी देश भी युद्ध की चपेट में
यह संघर्ष अब सिर्फ मुख्य युद्धरत पक्षों तक सीमित नहीं रहा। सोमवार की सुबह कुवैत ने घोषणा की कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन को मार गिरा रही है। संयुक्त अरब अमीरात ने भी ईरान की ओर से आ रहे हमलों से निपटने की पुष्टि की। बहरीन में हवाई हमले के सायरन बज उठे — वही बहरीन जहाँ अमेरिकी नौसेना का पाँचवाँ बेड़ा तैनात है।
खाड़ी सहयोग परिषद के देश — सऊदी अरब, यूएई, कुवैत, बहरीन, क़तर और ओमान — अब उस संघर्ष की सीधी चपेट में आ रहे हैं जिससे वे वर्षों तक दूर रहने की कोशिश करते रहे।
मैक्रों ने MBS को फ़ोन किया
इस बीच अंतरराष्ट्रीय कूटनीति भी तेज़ हो गई। फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से सीधी बात की। सऊदी विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मैक्रों ने सऊदी अरब के साथ फ्रांस की एकजुटता जताई, बार-बार हो रहे ईरानी हमलों की निंदा की, और रियाद की “संप्रभुता, सुरक्षा और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा” के लिए उठाए गए कदमों का पूरा समर्थन किया।
तेल बाज़ार में उबाल
जो लोग सीधे युद्ध क्षेत्र में नहीं हैं, उनके लिए इस संकट की सबसे ठोस अनुभूति हो रही है — पेट्रोल पंप पर और बिजली बिलों में। आंकड़े खुद बोलते हैं।
वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड रविवार शाम शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज पर ट्रेडिंग शुरू होते ही उछला, फिर $97.86 प्रति बैरल पर आ गया। अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड $111 प्रति बैरल से ऊपर था — जबकि पिछले हफ्ते यह $119.50 तक पहुँच गया था।

और सबसे चौंकाने वाला तथ्य? जब यह युद्ध शुरू हुआ था, ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग $70 प्रति बैरल थी। चार हफ्तों में $40 से ज़्यादा की बढ़ोतरी। इसका असर — महंगाई, ट्रांसपोर्ट लागत, खाद्य कीमतें — उन अरबों लोगों पर पड़ रहा है जिनका इस भू-राजनीतिक विवाद से कोई लेना-देना नहीं।
मानवीय त्रासदी: मृतकों की संख्या बढ़ रही है
कूटनीतिक बयानों और बाज़ार के आंकड़ों के पीछे एक इंसानी तबाही है जो अभी भी जारी है। अब तक की पुष्टि के अनुसार ईरान में 1,500 से अधिक, लेबनान में 1,000 से अधिक, इज़राइल में 15, और अमेरिकी सेना के 13 जवान मारे जा चुके हैं। खाड़ी क्षेत्र में समुद्र और ज़मीन पर कई नागरिक भी मारे गए हैं।
लेबनान और ईरान में लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं। और जो मानवीय सहायता तंत्र उनकी मदद के लिए चाहिए, वह उन्हीं इलाकों में काम कर रहा है जहाँ बमबारी जारी है।
अगले पाँच दिन क्या लाएंगे?
ट्रंप की पाँच दिन की मोहलत — आप इसे सच्ची कूटनीतिक कोशिश मान सकते हैं, या एक टिकटिक करती उलटी गिनती। हालात नहीं बदले हैं। होर्मुज़ अभी भी बंद है। ईरान अभी भी कह रहा है कि बातचीत हो ही नहीं रही। खाड़ी देशों पर अभी भी हमले हो रहे हैं। तेल $120 की तरफ बढ़ रहा है। और IEA चेतावनी दे रही है कि यह आधुनिक इतिहास का सबसे भयावह ऊर्जा संकट बन सकता है।
पाँच दिन बहुत कम होते हैं। और ये पाँच दिन तय करेंगे — क्या यह संघर्ष कूटनीति का रास्ता खोजेगा, या किसी ऐसी दिशा में जाएगा जिसका अभी कोई नाम नहीं है।
