World News
पाकिस्तान की मिसाइल से अमेरिका डरा? तुलसी गैबार्ड की चेतावनी ने मचाई हलचल
अमेरिकी खुफिया प्रमुख ने सीनेट में कहा — पाकिस्तान बना सकता है ICBM जो सीधे अमेरिकी ज़मीन तक पहुँचे, लेकिन विशेषज्ञ मान रहे हैं असलियत कुछ और है
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका के सबसे बड़े खुफिया अधिकारी का बयान सुनकर पूरी दुनिया चौंक गई। अमेरिकी डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस तुलसी गैबार्ड ने बुधवार को सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने एक ऐसी बात कही जो भारत के लिए भी बेहद अहम है।
उन्होंने कहा — पाकिस्तान ऐसी बैलिस्टिक मिसाइल बना सकता है जो सीधे अमेरिका की ज़मीन पर गिर सके।
गैबार्ड ने क्या कहा?
2026 की वार्षिक खतरा आकलन रिपोर्ट पेश करते हुए गैबार्ड ने कहा कि रूस, चीन, उत्तर कोरिया, ईरान और पाकिस्तान — ये पाँचों देश अमेरिकी मातृभूमि को निशाने पर लेने में सक्षम नए, उन्नत और पारंपरिक मिसाइल प्रणालियों पर शोध और विकास कर रहे हैं।
पाकिस्तान के बारे में खास तौर पर उन्होंने कहा कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी का आकलन है कि पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल विकास प्रक्रिया संभावित रूप से ICBM की दिशा में जा सकती है — यानी ऐसी मिसाइल जो अमेरिकी धरती तक पहुँचने में सक्षम हो।
और भी पढ़ें : “ईरान युद्ध इज़रायल के दबाव में शुरू हुआ” Trump के सबसे बड़े आतंकवाद-रोधी अधिकारी Joe Kent ने दे दिया इस्तीफा
सुनने में यह बात जितनी बड़ी लगती है, असलियत उतनी सीधी नहीं है।
क्या सच में पाकिस्तान के पास ऐसी मिसाइल है?
यहाँ रुकना ज़रूरी है। जैसे कोई कहे, “मेरे पड़ोसी के बेटे में डॉक्टर बनने की काबिलियत है” — तो इसका मतलब यह नहीं कि वह अभी डॉक्टर बन गया। ठीक यही हाल पाकिस्तान की मिसाइल क्षमता का है।
ICBM वह मिसाइल होती है जिसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक हो। पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसी कोई मिसाइल नहीं है। इसके अलावा पाकिस्तान और अमेरिका के बीच की दूरी 11,200 किलोमीटर से भी ज़्यादा है। इतनी दूरी तय करने वाली मिसाइलें फिलहाल सिर्फ रूस, अमेरिका, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन के पास हैं।
पिछले साल जनवरी में अमेरिकी अधिकारियों ने खुद माना था कि पाकिस्तान की लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता “कई वर्षों से एक दशक दूर” है।
तो फिर चेतावनी क्यों?
गैबार्ड ने यह भी खुलासा किया कि दुनिया में अभी 3,000 से ज़्यादा मिसाइलें हैं — और 2035 तक यह आँकड़ा बढ़कर 16,000 से ऊपर जा सकता है। यानी खतरा आज का नहीं, आने वाले कल का है। और अमेरिका अभी से तैयारी करना चाहता है।

यह ऐसा है जैसे कोई आज से ही अपने घर में बाढ़-रोधी दीवार बनाने लगे — क्योंकि 10 साल बाद बाढ़ आने की आशंका है।
भारत का ज़िक्र और पाकिस्तान की पलटवार
जैसे ही गैबार्ड की रिपोर्ट सामने आई, पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर आंद्राबी ने कहा कि पाकिस्तान की रणनीतिक क्षमताएं पूरी तरह रक्षात्मक हैं और दक्षिण एशिया में शांति बनाए रखने के लिए हैं। साथ ही पाकिस्तान ने यह भी दावा किया कि भारत की मिसाइल क्षमता 12,000 किलोमीटर तक है — जिसे विशेषज्ञ अतिरंजित बता रहे हैं।
भारत के लिए क्या मायने?
अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भारत-पाकिस्तान संबंध परमाणु संघर्ष का खतरा बने हुए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, “पिछले संघर्षों को देखते हुए जहाँ दोनों परमाणु-संपन्न देश आमने-सामने आए, तनाव बढ़ने का खतरा हमेशा बना रहता है।”
यह बात भारत को हल्के में नहीं लेनी चाहिए — भले ही पाकिस्तान की मिसाइल अभी अमेरिका तक न पहुँचे, वह भारत के लिए पहले से ही खतरा है।
दबाव की राजनीति या असली खतरा?
वाशिंगटन के विशेषज्ञ शुजा नवाज़ का कहना है कि यह बाइडेन प्रशासन की उस नीति की ही अगली कड़ी है जिसमें पाकिस्तानी संस्थाओं पर प्रतिबंध लगाए गए थे और नई तकनीक हासिल करने से रोकने की कोशिश की गई थी।
यानी एक पहलू यह भी है — अमेरिका पाकिस्तान पर दबाव बनाने के लिए भी इस तरह की रिपोर्टें सार्वजनिक करता रहा है।
सच चाहे जो भी हो — यह खबर साफ बताती है कि दक्षिण एशिया की भू-राजनीति तेज़ी से बदल रही है, और इसमें भारत की भूमिका और सतर्कता दोनों बढ़नी चाहिए।
