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54 अरब डॉलर का ड्रोन मिशन: अमेरिका आसमान में उतारना चाहता है लाखों ‘उड़ते बम’, पेंटागन की नई रणनीति ने बढ़ाई दुनिया की चिंता
यूक्रेन और मध्य-पूर्व के युद्धों से सबक लेते हुए अमेरिका अब कम लागत वाले लड़ाकू ड्रोन पर बड़ा दांव लगा रहा है। पेंटागन ने 18 महीने की विशेष प्रतियोगिता शुरू की है, जिसमें स्टार्टअप कंपनियों को भी मौका मिलेगा।
दुनिया में युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कभी टैंकों, लड़ाकू विमानों और भारी हथियारों पर निर्भर रहने वाली सेनाएं अब छोटे लेकिन बेहद घातक ड्रोन की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। इसी बदलते सैन्य परिदृश्य के बीच अमेरिका ने एक ऐसा कदम उठाया है, जिसने वैश्विक रक्षा विशेषज्ञों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन अब लाखों कम लागत वाले लड़ाकू ड्रोन तैयार करने की योजना पर काम कर रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका का मानना है कि भविष्य के युद्धों में ड्रोन निर्णायक भूमिका निभाएंगे और इसी कारण वह अपनी ड्रोन क्षमता को अभूतपूर्व स्तर तक बढ़ाना चाहता है।
ड्रोन युद्ध पर बड़ा दांव
हाल के वर्षों में यूक्रेन-रूस संघर्ष और मध्य-पूर्व में हुए सैन्य अभियानों ने दिखाया है कि छोटे ड्रोन भी बड़े सैन्य उपकरणों को नुकसान पहुंचाने में सक्षम हैं। कई मौकों पर सस्ते ड्रोन ने महंगे टैंक, रडार सिस्टम और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है।
इन्हीं अनुभवों को ध्यान में रखते हुए अमेरिका अब केवल पारंपरिक रक्षा कंपनियों पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसके बजाय वह नई तकनीक विकसित करने वाली स्टार्टअप कंपनियों को भी रक्षा क्षेत्र में अवसर देने की तैयारी कर रहा है।
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‘ड्रोन डोमिनेंस’ प्रतियोगिता की शुरुआत
पेंटागन ने “ड्रोन डोमिनेंस” नाम से 18 महीने की एक विशेष प्रतियोगिता शुरू की है। इसका उद्देश्य ऐसे निर्माताओं की पहचान करना है जो कम कीमत में बड़ी संख्या में प्रभावी लड़ाकू ड्रोन तैयार कर सकें।
इस कार्यक्रम के तहत करीब 1.1 अरब डॉलर के अनुबंध दिए जाने की योजना है। अनुमान है कि इसके माध्यम से लगभग 3 लाख ड्रोन तैयार किए जा सकते हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले वर्षों में यह संख्या और भी बढ़ सकती है।
स्टार्टअप कंपनियों को मिलेगा बड़ा मौका
दिलचस्प बात यह है कि इस योजना में केवल बड़े रक्षा उद्योग समूह ही शामिल नहीं हैं। कई ऐसी कंपनियां भी प्रतिस्पर्धा में उतर रही हैं जिनकी शुरुआत ड्रोन रेसिंग, हवाई लाइट शो या कृषि और निगरानी सेवाओं से हुई थी।
अमेरिका का मानना है कि नवाचार अक्सर छोटी और तेज़ी से काम करने वाली कंपनियों से आता है। इसलिए सरकार ऐसे उद्यमों को रक्षा तकनीक विकसित करने का अवसर दे रही है, जो पारंपरिक रक्षा क्षेत्र का हिस्सा नहीं रहे हैं।
54.6 अरब डॉलर का विशाल प्रस्ताव
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन ने अगले रक्षा बजट में ड्रोन कार्यक्रमों के विस्तार के लिए लगभग 54.6 अरब डॉलर तक का निवेश प्रस्तावित किया है। यदि यह योजना पूरी तरह लागू होती है, तो यह दुनिया के सबसे बड़े ड्रोन सैन्य कार्यक्रमों में से एक बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह निवेश केवल ड्रोन निर्माण तक सीमित नहीं होगा। इसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), स्वायत्त उड़ान तकनीक, निगरानी प्रणाली और उन्नत संचार नेटवर्क भी शामिल हो सकते हैं।
क्यों बढ़ रही है ड्रोन की अहमियत?
ड्रोन के बढ़ते उपयोग के पीछे कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण लागत है। एक आधुनिक लड़ाकू विमान की कीमत करोड़ों डॉलर हो सकती है, जबकि एक छोटा सैन्य ड्रोन अपेक्षाकृत बेहद सस्ता होता है।

इसके अलावा ड्रोन को जोखिम वाले क्षेत्रों में भेजा जा सकता है, जहां मानव सैनिकों की जान खतरे में पड़ सकती है। यही वजह है कि दुनिया की कई बड़ी सैन्य शक्तियां ड्रोन तकनीक में भारी निवेश कर रही हैं।
वैश्विक सुरक्षा पर क्या होगा असर?
अमेरिका की इस महत्वाकांक्षी योजना से वैश्विक हथियार प्रतिस्पर्धा और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर स्वायत्त ड्रोन युद्ध का हिस्सा बनते हैं, तो भविष्य के संघर्ष पहले से कहीं अधिक तकनीक-आधारित और जटिल हो सकते हैं।
कई विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि ड्रोन तकनीक के विस्तार के साथ नए सुरक्षा और नैतिक सवाल भी सामने आएंगे। स्वायत्त हथियार प्रणालियों के उपयोग को लेकर पहले से ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस चल रही है।
निष्कर्ष
अमेरिका का यह नया ड्रोन मिशन केवल सैन्य आधुनिकीकरण की योजना नहीं, बल्कि भविष्य के युद्धों की दिशा तय करने वाला कदम माना जा रहा है। यदि पेंटागन की योजना सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में युद्ध के मैदान में हजारों नहीं बल्कि लाखों ड्रोन सक्रिय दिखाई दे सकते हैं। ऐसे में दुनिया की रक्षा रणनीतियों और सुरक्षा नीतियों में भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
