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48 डिग्री की आग में झुलसा यूपी का यह जिला, सुबह 10 बजे ही बंद हो जाती हैं दुकानें

बांदा में लगातार बढ़ती गर्मी ने तोड़े पुराने रिकॉर्ड, लोग सुबह जल्दी निपटा रहे काम और दोपहर होते ही बाजार हो रहे बंद

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48 डिग्री की भीषण गर्मी के बीच उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में दोपहर से पहले ही खाली हुई सड़कें

उत्तर प्रदेश का बांदा इन दिनों ऐसी भीषण गर्मी झेल रहा है जिसने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल दी है। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि सुबह 10 बजे के बाद बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता है। लगातार बढ़ते तापमान ने न सिर्फ लोगों का घरों से निकलना मुश्किल कर दिया है, बल्कि व्यापार और रोजमर्रा की जिंदगी पर भी बड़ा असर डाला है।

मंगलवार को बांदा का तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस साल ही नहीं बल्कि पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड को भी पीछे छोड़ता दिखाई दिया। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल और मई के दौरान बांदा देश के सबसे गर्म जिलों में शामिल रहा है। इससे पहले अप्रैल में यहां 47.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि अब दिन की शुरुआत पहले जैसी नहीं रही। लोग सुबह 5 या 6 बजे ही घर से निकल जाते हैं ताकि जरूरी काम जल्दी खत्म कर सकें। दोपहर होने से पहले ही बाजार खाली होने लगते हैं।

अतर्रा कस्बे के एक ज्वेलरी दुकानदार लखन गुप्ता बताते हैं कि गर्मी ने कारोबार लगभग ठप कर दिया है। उनका कहना है कि सुबह कुछ ग्राहक दिखाई देते हैं, लेकिन 10 बजे के बाद पूरा इलाका सुनसान हो जाता है। दुकानों के शटर खुले रहते हैं, मगर ग्राहक शाम तक नहीं आते।

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विशेषज्ञों का मानना है कि बांदा में बढ़ती गर्मी केवल मौसम का सामान्य बदलाव नहीं है। इसके पीछे जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर पेड़ों की कटाई, जल स्रोतों का खत्म होना और तेजी से बढ़ता कंक्रीट निर्माण भी बड़ी वजह बन रहे हैं। पहले जिन इलाकों में हरियाली और तालाब गर्मी को संतुलित रखते थे, वहां अब सूखी जमीन और गर्म हवाएं दिखाई देती हैं।

गर्मी का असर सबसे ज्यादा मजदूरों, किसानों और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है। दोपहर में बाहर काम करना लगभग असंभव हो गया है। कई निर्माण स्थलों पर काम के समय में बदलाव किया गया है ताकि मजदूरों को लू से बचाया जा सके।

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डॉक्टरों ने लोगों को दोपहर में घर से बाहर न निकलने, ज्यादा पानी पीने और हल्के कपड़े पहनने की सलाह दी है। अस्पतालों में हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन के मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है। प्रशासन ने कई इलाकों में पानी के टैंकर और छांव की व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं।

बांदा का नाम अब उन शहरों की सूची में जुड़ता जा रहा है जो हर साल रिकॉर्ड तोड़ गर्मी झेल रहे हैं। पहले यह पहचान राजस्थान के चूरू और जैसलमेर जैसे शहरों की मानी जाती थी, लेकिन अब उत्तर भारत के कई हिस्से भी उसी स्तर की तपिश महसूस कर रहे हैं।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर पर्यावरण संरक्षण और जल बचाव पर तेजी से काम नहीं हुआ तो आने वाले वर्षों में ऐसी गर्मी सामान्य बन सकती है। फिलहाल बांदा के लोग सूरज ढलने का इंतजार कर रहे हैं ताकि शाम की थोड़ी ठंडी हवा उन्हें राहत दे सके।