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Work From Home रोकना पड़ सकता है भारी! ब्रिटेन की अदालत ने चिंता से जूझ रही महिला के पक्ष में सुनाया बड़ा फैसला
मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर ऑफिस बुलाने पर कंपनी पर लगा Disability Discrimination का आरोप, कोर्ट ने कर्मचारी को दी राहत
कोरोना महामारी के बाद Work From Home केवल सुविधा नहीं बल्कि कई कर्मचारियों की जरूरत बन चुका है। खासकर उन लोगों के लिए जो मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अब ब्रिटेन की एक अदालत ने इस मुद्दे पर ऐसा फैसला सुनाया है जिसने दुनियाभर की कंपनियों और कर्मचारियों का ध्यान खींच लिया है।
ब्रिटेन के एक रोजगार न्यायाधिकरण (Employment Tribunal) ने कहा है कि अगर किसी कर्मचारी को गंभीर चिंता (Severe Anxiety) या Agoraphobia जैसी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं, तो उसे जबरन ऑफिस बुलाना कानून का उल्लंघन माना जा सकता है। अदालत ने साफ किया कि ऐसे मामलों में Work From Home की सुविधा रोकना Disability Discrimination यानी विकलांगता आधारित भेदभाव की श्रेणी में आ सकता है।
यह मामला Marina Dudding नाम की महिला कर्मचारी से जुड़ा है, जो लंबे समय से Gravesham Borough Council में हाउसिंग ऑफिसर के तौर पर काम कर रही थीं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह Generalized Anxiety Disorder, डिप्रेशन और Agoraphobia जैसी मानसिक बीमारियों से जूझ रही थीं। यात्रा करने या शोरगुल वाले ऑफिस में काम करने के दौरान उन्हें घबराहट, सांस लेने में तकलीफ और पैनिक अटैक जैसी गंभीर समस्याएं होती थीं।
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बताया गया कि साल 2023 में मेडिकल छुट्टी से लौटने के बाद कंपनी ने उनकी Hybrid Working व्यवस्था खत्म कर दी और उन्हें रोज ऑफिस आने का आदेश दिया। कंपनी का कहना था कि उन्हें निगरानी में रखने की जरूरत है। हालांकि महिला कर्मचारी ने कई बार अपने अधिकारियों को बताया कि ऑफिस आने का दबाव उनकी मानसिक स्थिति को और खराब कर रहा है।
इसके बावजूद उनकी बात नहीं मानी गई और आखिरकार उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा, जहां London South Employment Tribunal ने महिला के पक्ष में फैसला सुनाया। अदालत ने कहा कि कंपनी को उनकी मानसिक स्थिति की पूरी जानकारी थी, फिर भी बिना ठोस कारण उन्हें रोज ऑफिस बुलाने का फैसला लिया गया।

जज Caoimhe O’Neill ने अपने फैसले में कहा कि कंपनी यह साबित नहीं कर सकी कि महिला की रोजाना ऑफिस मौजूदगी वास्तव में जरूरी थी। खास बात यह रही कि उसी टीम के दूसरे कर्मचारियों को अब भी Work From Home की अनुमति दी जा रही थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला आने वाले समय में दुनिया भर की कंपनियों के लिए बड़ा संकेत हो सकता है। अब कंपनियों को कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को ज्यादा गंभीरता से लेना पड़ सकता है, खासकर तब जब कर्मचारी पहले से किसी मेडिकल कंडीशन से गुजर रहा हो।
भारत समेत कई देशों में भी Hybrid Work Culture तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में यह फैसला कर्मचारियों के अधिकारों और मानसिक स्वास्थ्य पर नई बहस शुरू कर सकता है। कई लोग इसे Work-Life Balance और मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में एक अहम कानूनी कदम मान रहे हैं।
